नमामीशमीशान निर्वाणरूपं(Namami Shamishan Nirvanrupam)
नमामी शमीशान निर्वाणरूपं,विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् !निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं,चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ।। निराकारमोंकारमूलं तुरीयं,गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् !करालं महाकाल कालं कृपालं,गुणागार संसारपारं नतोऽहम् ।। तुषाराद्रि संकाश गौरं गंभीरं,मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम् !स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगङ्गा,लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ।। चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं,प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् !मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं,प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ।। प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं,अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम् !त्रयः … नमामीशमीशान निर्वाणरूपं(Namami Shamishan Nirvanrupam) वाचन सुरू ठेवा
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